जज्बात की राजनीति या सियासी जाल: क्या हम अपनी ही हार की इबारत लिख रहे हैं?

सियासत में अक्सर जो दिखाई देता है, वह होता नहीं; और जो होता है, वह आसानी से समझ नहीं आता। हाल के चुनावी नतीजों ने इस सच को एक बार फिर सतह पर ला खड़ा किया है। पहले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम, जहाँ सीमांचल की जमीन पर ओवैसी की पार्टी (AIMIM) ने अपनी… Continue reading

भारतीय मुसलमानों की पहचान का ऐतिहासिक छल

भारतीय मुसलमानों की पहचान को लेकर एक सुनियोजित वैचारिक जाल पिछले कुछ दशकों से लगातार बुना जा रहा है। भारतीय मीडिया और संप्रदायिक ताकतें जब मुसलमानों को “मुग़लों की औलाद” कहकर संबोधित करती हैं, तो यह केवल एक ऐतिहासिक भूल नहीं बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है। यह रणनीति मुसलमानों को विदेशी, आक्रांता और सत्ता-लोलुप साबित… Continue reading

झटका बनाम हलाल मीट : हिंदू धार्मिक आस्था या मुस्लिम-विरोधी राजनीति ? धार्मिक और वैज्ञानिक विश्लेषण

झटका मांस का प्रचार: हिंदू धार्मिक आस्था या मुस्लिम-विरोधी राजनीति ? धार्मिक और वैज्ञानिक विश्लेषण भारत आज एक ऐसे सामाजिक दौर से गुजर रहा है जहाँ खाने-पीने के चुनाव भी अब केवल स्वाद या सेहत तक सीमित नहीं रहे। भोजन आज पहचान, धर्म, मीडिया नरेटिव और व्यापारिक हितों से जुड़ता जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि… Continue reading

संघ–बीजेपी का ‘ओवैसी एजेंडा’ : ज़ुल्म, दंगे और ध्रुवीकरण से लंबा शासन

संघ–बीजेपी का ‘ओवैसी एजेंडा’ दरअसल ज़ुल्म, दंगों और सुनियोजित ध्रुवीकरण के ज़रिए लंबे शासन की एक गहरी राजनीतिक रणनीति है, जिसे समझे बिना आज देश में पैदा हो रही बेचैनी को समझा नहीं जा सकता। आज देश के एक बड़े हिस्से में, खासकर मुस्लिम नौजवानों के बीच गुस्सा, अपमान की पीड़ा, डर और साथ ही… Continue reading

एक ही काम, दो अलग प्रमाणपत्र? क्रिकेट, कॉरपोरेट ताक़त और “देशभक्ति” का दोहरा मापदंड

एक ही काम, दो अलग प्रमाणपत्र? क्रिकेट, कॉरपोरेट ताक़त और “देशभक्ति” का दोहरा मापदंड भारत में क्रिकेट अब सिर्फ़ खेल नहीं रहा, वह राजनीति, कॉरपोरेट ताक़त और राष्ट्रवाद की भाषा भी बोलने लगा है। इसी बीच एक गंभीर सवाल खड़ा होता हैक्या देशभक्ति का पैमाना सबके लिए एक-सा है, या यह ताक़त और पहचान देखकर… Continue reading

राजनीति, नफ़रत और व्यापार: मुसलमान को विलेन बनाने का पैटर्न

जब ग़ुस्सा धर्म पर उतरे और कारोबार सुरक्षित रहे आधुनिक राजनीति की सबसे ख़तरनाक चाल यह है कि वह जनता को असली सवालों से भटकाने के लिए एक स्थायी दुश्मन गढ़ देती है। आज भारतीय राजनीति में वह दुश्मन वह विलेन मुसलमान बना दिया गया है। बंगलादेश में एक हिंदू युवक की लिंचिंग होती है।… Continue reading

इतिहास का आईना: जब नफ़रत पैदा करने के लिए इतिहास को अधूरा पढ़ाया जाता है

आज भारत में जब भी “इतिहास” की बात होती है, तो कुछ तय नाम उछाले जाते हैं महमूद ग़ज़नवी, खिलजी, औरंगज़ेब। मानो इस देश में खून सिर्फ़ उन्हीं के दौर में बहा हो। लेकिन सवाल यह है क्या हिंसा का इतिहास सिर्फ़ मुस्लिम शासकों तक सीमित था? क्या हिंदू राजा, मराठा, राजपूत या सिख शासक… Continue reading

जिस हालात में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध का आदेश दिया, उसी हालात में क़ुरआन ने जिहाद की अनुमति दी ?

आज अगर आप यह कह दें कि जिस हालात में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध का आदेश दिया, उसी हालात में क़ुरआन ने जिहाद की अनुमति दी तो बहुत लोग भड़क जाएँगे। लेकिन सच्चाई यह है कि पांडव और पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ एक ही तरह की स्थिति में खड़े थे। फर्क़ सिर्फ़ इतना है कि… Continue reading

क्या इस्लाम काफ़िर माँ-बाप से रिश्ता तोड़ने को कहता है? Ex-Muslim नैरेटिव, क़ुरान की सच्चाई और ग्रंथों का तुलनात्मक विवेक

क्या इस्लाम काफ़िर माता-पिता से रिश्ता तोड़ने को कहता है? Ex-Muslim नैरेटिव का तथ्यात्मक जवाब | Qur’an 9:23 Explained आज सोशल मीडिया, यूट्यूब और ब्लॉग्स पर एक दावा बार-बार दोहराया जा रहा है कि इस्लाम अपने मानने वालों को काफ़िर माता-पिता से रिश्ता तोड़ने की शिक्षा देता है। इस दावे के समर्थन में अक्सर सूरह… Continue reading

क्या हमारी संवेदना भी अब धर्म देखकर तय होगी?

बंगलादेश में दीपू दास की लिंचिंग की घटना निस्संदेह दिल दहला देने वाली है। भीड़ द्वारा किसी भी इंसान की हत्या  चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या देश का हो  इंसानियत के ख़िलाफ़ अपराध है। दीपू दास की हत्या की जितनी निंदा की जाए, कम है। लेकिन इस घटना के बाद एक और सच्चाई… Continue reading